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हिमाचल में गांधी जयंती पर दो लाख परिवारों को बड़ी सौगात, 1500 रुपये और 300 यूनिट मुफ्त बिजली

2 अक्तूबर से दो लाख पात्र परिवारों को मिलेंगे 1500 रुपये और 300 यूनिट मुफ्त बिजली
स्वास्थ्य विभाग में 300 डॉक्टरों की भर्ती, मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के रिक्त पद भरने का लक्ष्य
वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ तीन साल में 32 शिकायतें, 21 मामलों की जांच लंबित


शिमला। हिमाचल प्रदेश में सुक्खू सरकार गांधी जयंती के दिन दो लाख पात्र परिवारों के लिए बड़ी योजना शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने सोमवार को विधानसभा सदन में घोषणा की कि 2 अक्तूबर को ‘अपना परिवार, सुखी परिवार योजना’ लॉन्च की जाएगी। इस योजना के तहत प्रदेश के दो लाख पात्र परिवारों को 300 यूनिट मुफ्त बिजली देने के साथ महिलाओं को 1500 रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

दिल्ली दौरे से लौटने के बाद सोमवार शाम विधानसभा पहुंचे मुख्यमंत्री ने नियम 130 के तहत स्वास्थ्य सेवाओं पर हुई चर्चा के दौरान यह घोषणा की। मुख्यमंत्री के इस ऐलान के साथ ही सरकार की दो प्रमुख चुनावी गारंटियों को एक साथ लागू करने का रास्ता साफ हो गया है।

सरकार की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार 300 यूनिट निशुल्क बिजली और इंदिरा गांधी प्यारी बहना योजना के तहत महिलाओं को 1500-1500 रुपये देने की घोषणा को अब एक ही योजना के तहत लागू किया जाएगा। ग्रामीण विकास विभाग की ओर से पात्र परिवारों का चयन भी किया जा चुका है।

दो योजनाएं एक साथ होंगी लागू, पात्र परिवारों का चयन पूरा

सरकार ने दोनों योजनाओं को अलग-अलग तरीके से लागू करने के बजाय अब इन्हें ‘अपना परिवार, सुखी परिवार योजना’ के तहत एक साथ प्रदेशभर में शुरू करने का निर्णय लिया है। इसके लिए पात्र परिवारों की पहचान का काम ग्रामीण विकास विभाग पहले ही पूरा कर चुका है।

इस योजना से जुड़े दो बड़े प्रावधान सीधे परिवारों की आर्थिक स्थिति से जुड़े हैं। एक ओर पात्र परिवारों को हर महीने की बिजली खपत में बड़ी राहत मिलेगी, वहीं पात्र महिलाओं को 1500 रुपये की आर्थिक सहायता प्रदान की जाएगी।

गांधी जयंती के अवसर पर योजना की शुरुआत को सरकार के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों घोषणाएं सरकार की चुनावी गारंटियों से जुड़ी हैं और इनके क्रियान्वयन को लेकर लंबे समय से प्रदेश में चर्चा होती रही है।

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए 300 डॉक्टरों की भर्ती

विधानसभा में मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य क्षेत्र को लेकर भी कई अहम घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के स्वास्थ्य विभाग में 300 डॉक्टरों के पद भरे जाएंगे। इसके अलावा दिसंबर से मार्च के बीच प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के सभी रिक्त पदों को चरणबद्ध तरीके से भरने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार अस्पतालों में डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने के लिए लगातार काम कर रही है। उनका कहना था कि बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं के लिए केवल भवन और आधारभूत ढांचा पर्याप्त नहीं है, बल्कि अस्पतालों में पर्याप्त संख्या में चिकित्सक, नर्स और अन्य स्वास्थ्यकर्मी भी उपलब्ध होना जरूरी है।

इसी दिशा में प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों में नई मशीनरी और चिकित्सा उपकरण स्थापित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि आईजीएमसी, चमियाना और टांडा मेडिकल कॉलेजों को बेहतर संस्थानों के रूप में विकसित किया जा रहा है।

स्वास्थ्य सेवाओं में खाली पद भरने पर सरकार का जोर

प्रदेश के मेडिकल कॉलेजों और बड़े अस्पतालों में मरीजों का दबाव लगातार बना रहता है। ऐसे में डॉक्टरों और नर्सों के खाली पद लंबे समय से महत्वपूर्ण मुद्दा रहे हैं। मुख्यमंत्री की ओर से 300 डॉक्टरों की भर्ती और मेडिकल कॉलेजों में नर्सों के रिक्त पद भरने की घोषणा को इसी कमी को दूर करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

सरकार का लक्ष्य दिसंबर से मार्च के बीच चरणबद्ध तरीके से नर्सों के रिक्त पदों को भरना है। इससे मेडिकल कॉलेजों में मरीजों को मिलने वाली सेवाओं में सुधार की उम्मीद है।

मुख्यमंत्री के सदन पहुंचते ही राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर फिर हंगामा

सोमवार को मुख्यमंत्री के सदन में पहुंचते ही राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया। विपक्षी सदस्यों ने इस मामले से संबंधित विधानसभा की फुटेज जारी करने की मांग उठाई।

विपक्ष का कहना था कि यदि सदन की फुटेज सार्वजनिक कर दी जाए तो पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। इस मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

हंगामा बढ़ने के कारण सदन की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। विपक्षी सदस्यों के शोर-शराबे के बीच स्थिति बिगड़ती गई और अंततः विधानसभा अध्यक्ष को सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

विधानसभा के पटल पर रखे गए आठ विधेयक

विधानसभा सचिव ने सोमवार को आठ विधेयकों की एक-एक प्रति सदन के पटल पर रखी। इन विधेयकों को सदन की ओर से पारित किए जाने के बाद राष्ट्रपति और राज्यपाल की स्वीकृति मिल चुकी है।

सदन के पटल पर रखे गए विधेयकों में हिमाचल प्रदेश विनियोग विधेयक 2026, हिमाचल प्रदेश भू-जोत अधिकतम सीमा संशोधन विधेयक 2024, हिमाचल प्रदेश मूल्य परिवर्धित कर संशोधन विधेयक 2026, हिमाचल प्रदेश पंचायती राज संशोधन विधेयक 2026 शामिल हैं।

इसके अलावा शिमला की सड़कों का उपयोग करने वालों तथा पैदल चलने वालों के लिए लोक सुरक्षा और सुविधा संशोधन विधेयक 2026, हिमाचल प्रदेश लिफ्ट संशोधन विधेयक 2026 और हिमाचल प्रदेश राज्य किसान आयोग विधेयक 2026 भी सदन के पटल पर रखे गए।

तीन साल में वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ 32 शिकायतें

विधानसभा में पुलिस विभाग से संबंधित एक अहम आंकड़ा भी सामने आया। भरमौर के विधायक डॉ. जनक राज के सवाल के लिखित जवाब में मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले तीन वर्षों में, 1 अगस्त 2026 तक, प्रदेश पुलिस विभाग में कनिष्ठ कर्मचारियों और अधिकारियों की ओर से अपने वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ कुल 32 शिकायतें दर्ज करवाई गई हैं।

इनमें सबसे अधिक 21 शिकायतें शिमला जिले से संबंधित हैं। इसके अलावा मंडी में चार, चंबा में दो, सिरमौर में दो और कांगड़ा में दो शिकायतें दर्ज हुई हैं। पुलिस जिला बद्दी से भी एक शिकायत सामने आई है।

शिकायतों की प्रकृति भी गंभीर रही है। इनमें उत्पीड़न, मानसिक प्रताड़ना, अधिकार और शक्तियों के दुरुपयोग, अनुचित हस्तक्षेप तथा महिला कर्मचारियों की ओर से लगाए गए लैंगिक उत्पीड़न के आरोप शामिल हैं।

11 शिकायतों का निपटारा, 21 मामलों की जांच अभी लंबित

सरकारी आंकड़ों के अनुसार कुल 32 शिकायतों में से 11 मामलों की जांच पूरी कर उनका निवारण किया जा चुका है। इनमें तीन गुमनाम शिकायतें भी शामिल हैं।

वहीं, 21 मामलों की जांच अभी लंबित चल रही है। सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि जिन शिकायतों का अब तक निवारण किया गया है, उनमें प्रथम दृष्टया ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया जिसके आधार पर वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अपेक्षित हो।

सरकार ने यह भी बताया कि पुलिस विभाग में अलग से कोई स्वतंत्र शिकायत निवारण तंत्र स्थापित करने का प्रस्ताव फिलहाल विचाराधीन नहीं है।

2 अक्तूबर पर रहेगी प्रदेश की नजर

मुख्यमंत्री की घोषणा के बाद अब सबसे ज्यादा नजर 2 अक्तूबर पर रहेगी। गांधी जयंती के अवसर पर ‘अपना परिवार, सुखी परिवार योजना’ की शुरुआत के साथ दो लाख पात्र परिवारों को 1500 रुपये की आर्थिक सहायता और 300 यूनिट मुफ्त बिजली से जोड़ने की प्रक्रिया शुरू होगी।

एक ही योजना के तहत दोनों चुनावी गारंटियों को लागू करने का सरकार का फैसला प्रदेश की राजनीति और आम परिवारों, दोनों के लिए महत्वपूर्ण है। अब देखना होगा कि योजना के लागू होने के बाद पात्र परिवारों को इसका लाभ किस प्रक्रिया और समयसीमा के तहत मिलना शुरू होता है।